मंगलवार, 4 अगस्त 2026

हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन: ग्रुप-डी के 23 कर्मचारियों की सेवा समाप्त, फर्जी दस्तावेजों और बायोमेट्रिक गड़बड़ी पर गिरी गाज

Written by: Manoj Yadav

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फर्जी दस्तावेजों और गलत सामाजिक-आर्थिक अंकों के आधार पर नौकरी पाने वाले 23 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त। ​हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की गहन जांच और बायोमेट्रिक मिलान में खुली पोल। ​बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के कर्मी शामिल। ​गलत तरीके से लिए गए वेतन की वसूली के साथ-साथ पुलिस में दर्ज कराई जाएगी एफआईआर (FIR)। ​प्रदेश सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए दिए सख्त निर्देश।


चंडीगढ़। NFLSpice News: हरियाणा में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक और बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा आयोजित ग्रुप-डी (Group-D) भर्ती प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों, गलत सामाजिक-आर्थिक (Socio-Economic) अंकों और बायोमेट्रिक मिसमैच के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले 23 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्य सचिव कार्यालय के निर्देशों के बाद संबंधित विभागों के प्रशासनिक अध्यक्षों ने इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

जांच और बायोमेट्रिक मिलान में सामने आई धांधली

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उन शिकायतों के बाद हुई जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई उम्मीदवारों ने फर्जी आय प्रमाण पत्र, गलत अनुभव प्रमाण पत्र और दूसरों की जगह परीक्षा दिलवाकर अंक हासिल किए थे। इसके बाद आयोग और सीआईडी की टीम ने चयनित उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक निशान और अपलोड किए गए दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन (Re-Verification) किया। जांच के दौरान 23 ऐसे कर्मचारियों की पहचान हुई, जिनके बायोमेट्रिक निशान मूल आवेदक से मेल नहीं खाए और जमा किए गए सामाजिक-आर्थिक अंक के दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए।

वेतन वसूली के साथ दर्ज होगी एफआईआर, भविष्य में ब्लैकलिस्ट

मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल सेवा समाप्ति ही नहीं, बल्कि इन फर्जी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज (Forgery) तैयार करने के आरोप में स्थानीय थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं। इसके अलावा, नियुक्ति के बाद से अब तक सरकार द्वारा उन्हें दिए गए पूरे वेतन और भत्तों की वसूली भी की जाएगी। आयोग ने इन सभी 23 अभ्यर्थियों को भविष्य में होने वाली सभी सरकारी परीक्षाओं से आजीवन या निश्चित अवधि के लिए डिबार (Debar/Blacklist) करने का फैसला भी लिया है।

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